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मिड डे मील पर बढ़ी निगरानी 33 मामले जांच के घेरे में
भागलपुर: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता और इससे जुड़ी घटनाओं पर अब खुफिया विभाग की नजर है। राज्य में मध्याह्न भोजन से संबंधित 33 मामलों की जांच की जा रही है। इनमें भागलपुर की तीन घटनाएं भी शामिल बताई जा रही हैं। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता, उसे तैयार करने और बच्चों तक पहुंचाने की व्यवस्था में कहां लापरवाही हुई।
सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में बच्चों को प्रतिदिन मध्याह्न भोजन दिया जाता है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीर माना जाता है। हाल के समय में अलग-अलग जगहों से मिड-डे मील को लेकर सामने आई शिकायतों और घटनाओं के बाद संबंधित मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है।
33 मामलों की हो रही जांच
जानकारी के अनुसार राज्य में मिड-डे मील से जुड़े कुल 33 मामलों को जांच के दायरे में लिया गया है। इसमें भोजन की गुणवत्ता खराब होने, बच्चों की तबीयत बिगड़ने और भोजन वितरण में कथित अनियमितता जैसी घटनाओं से संबंधित जानकारी की पड़ताल की जा रही है। जांच में संबंधित स्कूलों में भोजन बनाने की व्यवस्था, खाद्य सामग्री के रखरखाव, रसोई की साफ-सफाई और वितरण प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सकती है। घटनाओं के समय स्कूल स्तर पर क्या कदम उठाए गए और संबंधित अधिकारियों को कब सूचना दी गई, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
भागलपुर की तीन घटनाएं भी शामिल
भागलपुर जिले में सामने आई मिड-डे मील से जुड़ी तीन घटनाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इन मामलों से संबंधित रिकॉर्ड और घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और कहीं किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई। मिड-डे मील बच्चों के पोषण और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। इसलिए भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला बन जाती है।
खाने की गुणवत्ता पर बढ़ेगी निगरानी
स्कूलों में भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई, सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण बेहद महत्वपूर्ण है। निर्धारित मानकों के अनुसार भोजन तैयार करने के साथ उसे बच्चों को परोसने से पहले गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी जरूरी है। जांच के जरिए केवल संबंधित घटनाओं की वजह पता करना ही नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए व्यवस्था की कमियों की पहचान करना भी महत्वपूर्ण होगा। अगर जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है। बिहार में 33 मामलों की जांच और भागलपुर की तीन घटनाओं को इसके दायरे में लिए जाने के बाद स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित मामलों में जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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